Ear Problems

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कान की समस्या

कान के पर्दे में छेद होने के कई कारण होते हैं जैसे चोट, लंबे समय से जुकाम आदि। समय रहते इसका इलाज ना किया जाए तो सर्जरी करानी पड़ती है क्योंकि अधिक समय होने पर छेद के सिरे स्थिर हो जाते हैं। 

इस सर्जरी को टिम्पेनोप्लास्टी कहते है जिसमें कान को बाहर से चीरा लगाकर खोला जाता है लेकिन कई लोग इससे बचना चाहते हैं।

 ऎसे  में ट्रांसकेनाल पद्धति मददगार हो सकती है। इस पद्धति में पर्दे का प्रत्यारोपण कान की नेचुरल केनाल से होकर ही किया जाता है। बाहर से चीरा लगाकर कान को नहीं खोला जाता है। सुनने में सहायक हडि्डयों का परीक्षण कर कमी होने पर उन्हें भी दुरूस्त किया जाता है। नए पर्दे का मैटीरियल भी कान के अन्दर से ही ले लिया जाता है। ऎसे  में ट्रांसकेनाल पद्धति मददगार हो सकती है। इस पद्धति में पर्दे का प्रत्यारोपण कान की नेचुरल केनाल से होकर ही किया जाता है।

– फायदे –
कान बाहर से नहीं खुलता जिससे ज्यादा चीरफाड़ भी नहीं होती, साथ ही निशान भी नहीं आता। केवल कान को सुन्न किया जाता है और रिकवरी भी जल्दी हो जाती है।

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